फ़क़त रब का इशारा देखना हैकज़ा को कब बहाना देखना है
दिल में जो था वो प्यारा गयामेरे दिल का सहारा गया
ईमान अपने बीच के सारे बदल गएदौलत की बात आई तो रिश्ते बदल गए
शाम है और यार है रूठा हुआज़र्ब पर इक ज़र्ब है ये क्या हुआ
उल्फ़त का कोई ग़म मुझे ढोना भी नहीं हैअब दिल को तेरे वास्ते रोना भी नहीं है