बात करता नहीं कभी कोईये भी क्या दोस्ती हुई कोई
हम ग़रीब लोगों का तो ख़ुदा मुहाफ़िज़ हैकुछ नहीं तुम्हें हासिल ज़ोर आज़माने से
जब चले थे एक थे अब कारवाँ होने लगेदोस्तों के साथ दुश्मन मेहरबाँ होने लगे