Qaafiya Bazm-e-Adab

मिल जाएगी दुनिया में ही जन्नत उसे कहना
करता रहे माँ बाप की ख़िदमत उसे कहना

एक ठोकर लगी साँवली चोट है
माँ को इतना ही क़िस्सा सुनाया गया

देती है मिरी अक़्ल मिरे दिल को दिलासा
मिल जाएगा फिर दूसरा चेहरा भी शनासा

किसे मालूम वो बूढ़ी अजब सदमे में रहती है
पलट कर आएगा बेटा इसी जज़्बे में रहती है

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