देती है मिरी अक़्ल मिरे दिल को दिलासा
मिल जाएगा फिर दूसरा चेहरा भी शनासा
है अक़्ल परेशान तो मायूस है दिल भी
लगने लगा अपना ही मुझे चेहरा बुरा सा
पानी की जगह कोई उसे ज़हर न दे दे
बरसों से रहा क़ैद में बेचारा वो प्यासा
हो जाएंगे दिन दूर परेशानी के और फिर
तुम देखना एक रोज पलट जाएगा पासा
हर दर पे मैं क्यों जाता नहीं उसका सबब है
हर दर मुझे लगता ही नहीं मेरे खुदा सा
अशआर सुनें मेरे तो कहने लगे शा'इर
उस्मान हमें लगता है दिल तेरा जला सा