सब्र कर सब्र की घड़ी हैं अभी
इतनी मुश्किल से जो मिली हैं अभी
वक़्त से पहले मौत अच्छी नहीं
जिंदगी सामने पड़ी हैं अभी
आँख रंजूर हो गयी मेरी
उस ने जाने की ज़िद गड़ी हैं अभी
बाद तेरे कोई नहीं होगा
तू मेरी आख़िरी ख़ुशी हैं अभी
तू भी परवेज़ को समझ न सका
तंज़ तेरा भी लाज़मी हैं अभी