Qaafiya Bazm-e-Adab

Mohabbat Ko Samajhna Hai, Mohabbat Karke Aa Jaao

Tauhid Ansari

मोहब्बत से मोहब्बत की
मोहब्बत में समझाओ
मोहब्बत को समझना है
मोहब्बत करके आ जाओ

मोहब्बत एक समंदर है
कि जिसमें आग है जाना
मोहब्बत की ही लपटों से
सभी बर्बाद है जाना

मोहब्बत चीज़ है ऐसी,
कि जिसकी न कोई हद है
मोहब्बत करके आया हूँ
अभी तक उसका ही ज़द है

मोहब्बत एक मुसाफ़िर है
मोहब्बत एक सवाली है
मोहब्बत ही तो मंज़िल है
मोहब्बत ही तो साहिल है

मोहब्बत हीर राँझा है
मोहब्बत ही तो लैला है
मोहब्बत ही तो मजनूँ है
मोहब्बत ही तो छैला है

मोहब्बत नाम है यारों
मोहब्बत काम है यारों
मोहब्बत दिन भी मेरा है
मोहब्बत शाम है यारों

मोहब्बत ही इबादत है
मोहब्बत ही क़यादत है
मोहब्बत ही मेरी दुनिया
मोहब्बत ही रफ़ाक़त है

मोहब्बत की ये बातें हैं
मोहब्बत वाले समझेंगे
मोहब्बत की सलाह, तशबीह
मोहब्बत वाले समझेंगे

ये हैं 'तौहीद' की बातें
इन्हें छोड़ो चले जाओ
मोहब्बत को समझना है
मोहब्बत करके आ जाओ

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