बे वफ़ा जब पुकारा गयाउनकी जानिब इशारा गया
ये जुदाई भी कर्ब लाई हैक्या क़यामत तेरी जुदाई है
तकरार में कुछ ऐसे भी लम्हात आ गएइक बेवफा से मिलने के हालात आ गए
वो जुदाई की घड़ी और सानिहा कैसा लगाटूट कर बिखरा हुआ इक आईना कैसा लगा
हालाकि दिल से इश्क़ का काँटा निकल गयालेकिन जो उसका ज़हर था दिल में ही पल गया