Qaafiya Bazm-e-Adab

Taqraar Mein Kuch Aise Bhi Lamhaat Aa Gaye

Osama Siddiqui

तकरार में कुछ ऐसे भी लम्हात आ गए
इक बेवफा से मिलने के हालात आ गए

उस बेवफ़ा की याद का आलम न पूछिए
हद से गुज़रने के भी खयालात आ गए

पर बेवफ़ाई से हमें कुछ सीख भी मिली
बातें बनाने के जो कमालात आ गए

सपनों की राह में वो जो कॉटे बिछा गए
अब याद में भी उन के निशानात आ गए

किस्सा तुम्हारे नाम का फिर से जो छिड़ गया
तो वस्ल के भी याद मक़ामात आ गए

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