Qaafiya Bazm-e-Adab

Be-Wafa Jab Pukara Gaya

Ishtiyaque Asar

बे वफ़ा जब पुकारा गया
उनकी जानिब इशारा गया

मै जुनूं ज़ाद  देखो ज़रा
उस गली में दोबारा गया

ये मुनाफे की शय ही नहीं
इश्क़ में सिर्फ हारा  गया

देखिए क़त्ल करके हमें
हमको क़ातिल पुकारा गया

लो उठी उनकी तेग-ए-नज़र
कोई बे मौत मारा गया

चाहिए था खिलौना उन्हें
मैं जमीं  पर उतारा गया

था सहारा तेरी दीद का
अब तो वो भी सहारा गया

बाद तेरे गुज़ारा न था
फिर भी देखो गुज़ारा गया

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