Qaafiya Bazm-e-Adab

Kya Mila Mujhe Aakhir Dosti Nibhane Se

Sardar Ali Sayed

हम ग़रीब लोगों का तो ख़ुदा मुहाफ़िज़ है
कुछ नहीं तुम्हें हासिल ज़ोर आज़माने से

साथ मिल गए मेरे दोस्त जाके दुश्मन से
क्या मिला मुझे आख़िर दोस्ती निभाने से

मौत की ख़बर सुनकर दौड़ कर चले आना
क़ब्र तक उठा लेना मुझको ग़ुस्लख़ाने से

इम्तिहान ऐसा भी ले लिया था सरवर ने
कौन छोड़ जाता है इक दिया बुझाने से

तितलियाँ टहलती हैं, आज बाग़बाँ दिल है
फूल झड़ रहे होंगे उसके लब हिलाने से

बंद कर लिया मैंने दिल का मेरे दरवाज़ा
अब नहीं खुलेगा ये तेरे खटखटाने से

ये जो मुस्कुराता सर दार पर लटकता है
इश्क़ में अली के है ये ज़बाँ कटाने से

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