जब चले थे एक थे अब कारवाँ होने लगे
दोस्तों के साथ दुश्मन मेहरबाँ होने लगे
हाँ समझ आता है तुम इस्कूल-कॉलेज में रखो
अब तो यारों प्यार में भी इम्तिहाँ होने लगे
हो गई जब से मुहब्बत उससे हमको दोस्तों
हम ज़मीं पर रफ़्ता-रफ़्ता आसमाँ होने लगे
पीठ पीछे कह रहे थे मैं बुरा इंसान हूँ
सामने आ जाऊँ गर तो बेज़ुबाँ होने लगे
फूल खिलते थे कभी जब बात करती थी परी
लफ़्ज़ उसके हाय अब तीर-ओ-कमाँ होने लगे
छुप गई सारी हक़ीक़त ज़िंदगी की और सच
वाक़िया, क़िस्सा, लतीफ़ा, दास्ताँ होने लगे
शायरी सुन कर मिरी अब आसमाँ वाले सभी
यक-ब-यक शाबाश कह कर मेज़बाँ होने लगे
कर रही है शब नमाज़ों में दुआ माँ आपकी
आप पर ‘सरदार’ सदक़ा दो जहाँ होने लगे