Qaafiya Bazm-e-Adab

Jab Chale The Ek The, Ab Karwaan Hone Lage

Sardar Ali Sayed

जब चले थे एक थे अब कारवाँ होने लगे
दोस्तों के साथ दुश्मन मेहरबाँ होने लगे

हाँ समझ आता है तुम इस्कूल-कॉलेज में रखो
अब तो यारों प्यार में भी इम्तिहाँ होने लगे

हो गई जब से मुहब्बत उससे हमको दोस्तों
हम ज़मीं पर रफ़्ता-रफ़्ता आसमाँ होने लगे

पीठ पीछे कह रहे थे मैं बुरा इंसान हूँ
सामने आ जाऊँ गर तो बेज़ुबाँ होने लगे

फूल खिलते थे कभी जब बात करती थी परी
लफ़्ज़ उसके हाय अब तीर-ओ-कमाँ होने लगे

छुप गई सारी हक़ीक़त ज़िंदगी की और सच
वाक़िया, क़िस्सा, लतीफ़ा, दास्ताँ होने लगे

शायरी सुन कर मिरी अब आसमाँ वाले सभी
यक-ब-यक शाबाश कह कर मेज़बाँ होने लगे

 

कर रही है शब नमाज़ों में दुआ माँ आपकी
आप पर ‘सरदार’ सदक़ा दो जहाँ होने लगे

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