दिल में जो था वो प्यारा गया
मेरे दिल का सहारा गया
ख़्वाब में जो मिला था मुझे
जागते ही वो सारा गया
जिसको पत्थर समझ बैठे वो
आइने में उतारा गया
जब भी उनकी गली में गए
हाथ से दिल हमारा गया
आई जब भी मुसीबत कहीं
तब ख़ुदा को पुकारा गया
तौबा की थी मगर शाम को
दिल वहीं पर दुबारा गया
अब नहीं लौट सकते "अली"
दूर तुमसे किनारा गया