ईमान अपने बीच के सारे बदल गए
दौलत की बात आई तो रिश्ते बदल गए
तबदीलियाँ ही लाती हैं मौसम नए-नए
बस इस लिए भी हम यहाँ थोड़े बदल गए
अहबाब मेरे हो गए यार अमीर शहर
नीयत जो उनकी बदली तो कितने बदल गए
अब देखना भी मुझ को गवारा नहीं उन्हें
मिलते थे जो ख़ुलूस से ऐसे बदल गए
ज़रदार वक़्त से जो कभी सामना हुआ
लफ़्ज़ों के साथ लोगों के लहजे बदल गए
यारो निगार-ख़ाना-ए-दुनिया है वो जहाँ
चेहरे बदल गए कभी शीशे बदल गए
दौलत से क्या नवाज़ दिया रब ने आप को
तेवर के साथ सैफ़ के लहजे बदल गए