Qaafiya Bazm-e-Adab

Imaan Apne Beech Ke Saare Badal Gaye

Saif Ahmad Saif

ईमान अपने बीच के सारे बदल गए
दौलत की बात आई तो रिश्ते बदल गए

तबदीलियाँ ही लाती हैं मौसम नए-नए
बस इस लिए भी हम यहाँ थोड़े बदल गए

अहबाब मेरे हो गए यार अमीर शहर
नीयत जो उनकी बदली तो कितने बदल गए

अब देखना भी मुझ को गवारा नहीं उन्हें
मिलते थे जो ख़ुलूस से ऐसे बदल गए

ज़रदार वक़्त से जो कभी सामना हुआ
लफ़्ज़ों के साथ लोगों के लहजे बदल गए

यारो निगार-ख़ाना-ए-दुनिया है वो जहाँ
चेहरे बदल गए कभी शीशे बदल गए

दौलत से क्या नवाज़ दिया रब ने आप को
तेवर के साथ सैफ़ के लहजे बदल गए

🔗 Link copied!