उल्फ़त का कोई ग़म मुझे ढोना भी नहीं है
अब दिल को तेरे वास्ते रोना भी नहीं है
जाना है तुम्हें छोड़ के, तुम शौक से जाओ
बर्बाद मुझे इश्क़ में होना भी नहीं है
औरों को तो देता है जगह पहलू में अपने
मेरे लिए दिल में तेरे कोना भी नहीं है
याँ अक़्ल को कुछ फ़िक्र नहीं है मेरे हमदम
और दिल को तेरी याद में सोना भी नहीं है
यूँ तोड़ के तुम जोड़ते रहते हो मुसलसल
"ये दिल किसी बच्चे का खिलौना भी नहीं है"
ग़ज़लों में बहुत बातें हुई उनकी वफ़ा पर
अल्फ़ाज़ को अब और पिरोना भी नहीं है
ये हिज्र मोहब्बत की निशानी है यहाँ पर
मिल जाए तुम्हें सैफ़ तो रोना भी नहीं है