Qaafiya Bazm-e-Adab

Yun Chhupna Chhupana Mohabbat Nahin Hai

Nafis Alam Shaikh

मैं बैठा हूँ कबसे यहाँ और उसको मुझे देखने कि भी फुर्सत नहीं है
चलो मुझको लेकर कही और फिर तुम मिरी जब यहाँ कुछ ज़रूरत नहीं है

में बीमारे दिल था शिफा तुझसे पाई यही इक अदा तेरी मुझको जो भायी
है राहत तेरा देखना मुझको जाना के तुझसा कोई खूबसूरत नहीं है

ज़मीं पे नहीं है जहाँ में नहीं है, गुमाँ में नहीं है कही भी नहीं है
बड़ी सादगी से ये कहता हूँ हमदम तेरे हुस्न सी कोई मूरत नहीं है

जो बोली लगाना है जिसको लगा ले मयस्सर किसी को नहीं होने वाला
में अनमोल हूँ दुनिया वालों कि खातिर तेरे वास्ते कोई कीमत नहीं है

क्यों चुपके से तुम अब मुझे देखते हो ज़रा सामने मेरे आओ कभी तो
मैं तुमको बता दूँगा क्या है मोहब्बत यूँ छुपना छुपाना मोहब्बत नहीं है

वो हर शाम सुनती है ग़ज़लें हमारी यूँ दिल को वो बहलाती नादाँ कुँवारी
वो कहती है मुझसे यूँ नफरत है उसको मगर शायरी से तो नफरत नहीं है

वो हर मोड़ पर इक नई शाम आई जो वादा था कल का कहाँ मिलने आई
यूँ लाज़िम है तुमपे ये गुस्सा हमारा मगर रूठना मेरी आदत नहीं है 

बताओ नफीस अब जो था गम तुम्हारा नहीं था क्या तुमको किसी का सहारा
था जो गम मेरा वो सुनाया खुदा को समझ पाओ तुम इतनी हिम्मत नहीं है

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