नादानियोँ पे अपनी हँसे जा रहा हूँ मैं
काग़ज़ पे तेरा नाम लिखे जा रहा हूँ मैं
शायद वो मुझ को रोक ले बस इतनी आस पे
कहता हूँ बार बार उसे जा रहा हूँ मैं
जाना है किस तरफ़ मुझे मालूम ही नहीं
चलता ही जा रहा हूँ चले जा रहा हूँ मैं
आ देख तेरे हिज्र ने क्या हाल कर दिया
रोने की बात पर भी हँसे जा रहा हूँ मैं
क्यूँ ज़िन्दगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैर
क्यूँ इस ज़मीं पे बोझ बने जा रहा हूँ मै
दिवार पे लिखे हुए अल्फ़ाज़ की तरह
औराक़ ए ज़िन्दगी से मिटे जा रहा हूँ मैं
आबाद ज़िन्दगी तो मुझे कर नहीं सकी
बर्बाद ज़िन्दगी को किये जा रहा हूँ मैं