मुझे पता है आंखें रो-रो कर थक गई हैं
फूलों से हाथ खुदा से सवाल करते हैं
वो कहां गया जिसने मुझे
इंतज़ार करने को कहा था
मुझे पता है
वो बर्तन धोकर जब तन्हा बैठती है
तो यही सोचती है, हां यही सोचती है
कि कब मैं उसके कंधे पर अपना सर रख पाऊंगी
मुझे पता है
उसका बाप तस्वीरें दिखाते दिखाते थक चुका होगा
मुझे पता है
वो किसी और की याद में रोते-रोते सो गई होगी
मुझे पता है
वो मंदिर में दीये जला-जला कर अपने हाथ जला चुकी है
इस उम्मीद में कि इक दिन उसकी ज़िंदगी किसी के आने से रोशन होगी
मुझे पता है
एक लड़की बकरियां चराते हुए
बस यही सोचती होगी
कि उसका महबूब कब लौट कर आएगा जो कह कर गया था
“मैं जल्द वापस आऊंगा”
मुझे पता है
वो रात भर आसमान देखते हुए जागती होगी
जो कभी ईशा पढ़कर सो जाया करती थी
मुझे पता है
वो हसीन गरीब लड़की
मांगते हुए जब किसी हंसते हुए जोड़े को देखती है
तो यही सोचती है
कौन मुझसे शादी करेगा?
कौन मोहब्बत से मेरा हाथ थामेगा और मुझसे पूछेगा
“तुम क्या खाओगी?”
मुझे पता है
एक ज़ईफ़ बाप सजदे में यही सोचता है
कि मैं कैसे बेटी के ससुराल की मांगें पूरी करूं
मुझे पता है
लड़का दरिया किनारे बैठ कर नुसरत को सुनता है
हाथ में सिगरेट जलाई इसी उम्मीद से रखता है
कि उसकी उम्र कम हो जाए
मुझे पता है
लड़का ये भी सोचता है
कि उसका महबूब जहां भी हो,
खुदा की अमान में हो
वो सोचता है
कि इक दिन ये दुनिया उनकी मोहब्बत कुबूल कर लेगी
कितना मासूम सोचता है…
मुझे पता है
एक शायर ने बस इसलिए शायरी छोड़ दी थी
कि उसकी महबूबा अब किसी और की बीवी बन चुकी है
हां, उसने अपनी आखिरी ग़ज़ल उसके नाम पर लिख कर
अपनी कलम तोड़ दी थी
मुझे पता है
तुम्हें मोहब्बत से बेहद नफरत है
मुझे पता है
तुम जौन को पढ़ती हो
मुझे पता है
वो रोज़ इसलिए शाम पांच बजे बाग में जाता है
कि उससे किसी ने कहा था
“मैं आऊंगी, मेरा इंतज़ार करना”
और तुझे क्या पता
तुझे क्या
तू जिसके लिए अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर चुकी है
वो शख्स तेरा मज़ाक बनाता है
तेरे दर्द पे हंसता है, मुस्कुराता है
मुझे पता है
इश्क ने नस्लें बर्बाद की हैं
मुझे पता है
कि इश्क बहुत हसीन है