Qaafiya Bazm-e-Adab

Zaat Mein Teri Fanaa Hoon, Tujh Mein Hi Shaamil Hoon Main

Imran Ataai

ज़ात में तेरी फ़ना हूं तुझ में ही शामिल हूं मैं
तू है दरया ए मोह़ब्बत और तेरा साहिल हूं मैं

तेरी बातें तेरी यादें हर जगह है तू ही तू
ये मक़ामे इश्क़ है और इश्क़ में कामिल हूं मैं

क्या बताऊँ इस तरफ कितनी अज़िय्यत है सनम
इश्क़ में टूटा है दिल जख़्मों से भी घायल हूं मैं

टूट कर चुभ जाएगा ये ख़्वाब तू मेरे न देख
अपनी आंखें मत गंवा एक ख़्वाब ला हासिल हूं मैं

क्यूं न होता दिल मेरा घायल तेरे दीदार से
तू सरापा हुस्न ठहरा और सादा दिल हूं मैं

तुझ को यादों में बसा कर चूमता हूँ तेरे लब
एक तरफा प्यार में भी इस तरह शामिल हूँ मैं

 

लोग कहते हैं अताई अक़्ल से कुछ काम ले
अक़्ल कहती है ये मुझ से इश्क़ का कायल हूँ मैं

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