ये तेरी आंख में कैसी शराब है प्यारे
कि बिन पिए मेरी हालत ख़राब है प्यारे
लगे कि वक़्त से पहले ही अब क़यामत है
कुछ ऐसा ये तेरा हुस्न-ओ-शबाब है प्यारे
तेरे लबों को ही क्यूँ सब गुलाब कहते हैं
तिरा तो सारा बदन ही गुलाब है प्यारे
ख़ुदारा आज तो हम पर ज़रा इनायत हो
शब-ए-विसाल है फिर क्यूँ हिजाब है प्यारे
तेरे सितम का अभी एहतिसाब क्या करना
अभी तो ये तेरा दौर-ए-शबाब है प्यारे
सुकून-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र बाद तेरे दुनिया का
तसव्वुरात में लाना अज़ाब है प्यारे
लो आ गए न 'असर' तुम भी दिल की बातों में
ये दिल का क्या है ये खाना-ख़राब है प्यारे