Qaafiya Bazm-e-Adab

Ye Teri Aankh Mein Kaisi Sharaab Hai Pyare

Ishtiyaque Asar

ये तेरी आंख में कैसी शराब है प्यारे
कि बिन पिए मेरी हालत ख़राब है प्यारे

लगे कि वक़्त से पहले ही अब क़यामत है
कुछ ऐसा ये तेरा हुस्न-ओ-शबाब है प्यारे

तेरे लबों को ही क्यूँ  सब गुलाब कहते हैं
तिरा  तो सारा बदन ही गुलाब है प्यारे

ख़ुदारा आज तो हम पर ज़रा इनायत हो
शब-ए-विसाल है फिर क्यूँ हिजाब है प्यारे

तेरे सितम का अभी एहतिसाब क्या करना
अभी तो ये तेरा दौर-ए-शबाब है प्यारे

सुकून-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र बाद तेरे दुनिया का
तसव्वुरात में लाना अज़ाब है प्यारे

लो आ गए न 'असर' तुम भी दिल की बातों में
ये दिल का क्या है ये खाना-ख़राब है प्यारे

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