Qaafiya Bazm-e-Adab

Uth Ke Bistar Se Hum Kaam Par Jaayenge

Nafis Alam Shaikh

उठ के बिस्तर से हम काम पर जाएँगे
आपकी याद में थोड़ी मर जाएँगे

ना इधर जाएँगे ना उधर जाएँगे
जिस तरफ वो मुड़े हम उधर जाएँगे

लौट आएगी वो खुशियाँ फिरसे मेरी
मेरे बच्चे भी जब नाम कर जाएँगे

हर तरफ है यहाँ नफ़रतें देख लो
हमसफ़र क्या करें हम किधर जाएँगे

सब तो जाएँगे तेरे बदन की तरफ
हम तिरे दिल के अंदर उतर जाएँगे

आओ बातें करें वक़्त भी हैं हसीँ
छोड़ कर तनहा क्यों आप घर जाएँगे

सब कहेंगे तुम्हें तुम हो अच्छी भली
हम तुम्हारे ही मुँह पर मुकर जाएँगे

चिट्ठियाँ मैंने लिक्खी हैं जो प्यार से
कब कबूतर ये उनके भी घर जाएँगे

देर से आते है कम ही घर जाते हैं
माँ के हम लाड़ले कब सुधर जाएँगे

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