उठ के बिस्तर से हम काम पर जाएँगे
आपकी याद में थोड़ी मर जाएँगे
ना इधर जाएँगे ना उधर जाएँगे
जिस तरफ वो मुड़े हम उधर जाएँगे
लौट आएगी वो खुशियाँ फिरसे मेरी
मेरे बच्चे भी जब नाम कर जाएँगे
हर तरफ है यहाँ नफ़रतें देख लो
हमसफ़र क्या करें हम किधर जाएँगे
सब तो जाएँगे तेरे बदन की तरफ
हम तिरे दिल के अंदर उतर जाएँगे
आओ बातें करें वक़्त भी हैं हसीँ
छोड़ कर तनहा क्यों आप घर जाएँगे
सब कहेंगे तुम्हें तुम हो अच्छी भली
हम तुम्हारे ही मुँह पर मुकर जाएँगे
चिट्ठियाँ मैंने लिक्खी हैं जो प्यार से
कब कबूतर ये उनके भी घर जाएँगे
देर से आते है कम ही घर जाते हैं
माँ के हम लाड़ले कब सुधर जाएँगे