तुझ पे अगर इल्ज़ाम नहीं है
इश्क़ में तेरा काम नहीं है
वो चाहे गुलफाम नहीं है
खास है फिर भी आम नहीं है
उसकी मर्ज़ी कब तक ठहरे
दिल का कोई दाम नहीं है
जिसमें तड़पा न हो ये दिल
ऐसी कोई शाम नहीं है
मैं जिंदा हूं अब तक कैसे
इश्क़ का ये अंजाम नहीं है
सब कुछ मेरे पास है लेकिन
दिल को क्यूँ आराम नहीं है
हर वो कहानी झूठी है बस
जिस में तेरा नाम नहीं है