तेरे दीवाने के सर वैसे हैं इल्ज़ाम बहुत
उनमें ये ख़ास कि लेता है तेरा नाम बहुत
मुझको है याद बहलते थे तुम इससे अक्सर
दिल है मेरा मगर आया है तेरे काम बहुत
दिल है दाना मेरा माइल न हुआ बार-ए-दिगर
वर्ना आते हैं हसीनाओं के पैग़ाम बहुत
ज़ख्म तो सबने लगाए हैं चलो तुम भी सही
वैसे भी दिल में हैं मेरे ग़म ओ आलाम बहुत
उनको अब याद नहीं है 'असर' उस कूचे में
पहले मैं जाता तो आते थे सर ए बाम बहुत
हाय उनके लब ए नाज़ुक वो महरबां बाहें
याद आती है कोई शाम सर ए शाम बहुत