Qaafiya Bazm-e-Adab

Sher-o-Sukhan Mein Khoob Rasai Ke Baad Bhi

Usman Akbar

शे'र-ओ-सुख़न में खूब रसाई के बाद भी
गुमनाम हूं मैं नग़्मा-सराई के बाद भी

अब भी है तुमसे प्यार मिरे यार बेशुमार
तुमको मैं चाहता हूं जुदाई के बाद भी

ये कौन कह रहा है की दौलत में है सुकून
मिलता नहीं सुकून कमाई के बाद भी

अब तक कोई भी नौकरी उसको मिली नहीं
बेरोज़गार है वो पढ़ाई के बाद भी

मायूस कर सका ना ग़म-ए-इश्क़ भी मुझे
मैं मुस्कुरा रहा हूं जुदाई के बाद भी

 

उस्मान अकबर आपको वो हो गया बुखार
होता नहीं जो ठीक दवाई के बाद भी

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