Qaafiya Bazm-e-Adab

Shayar ho mere husn pe kuch sher to kaho

Zakki Khan

शायर हो मेरे हुस्न पे कुछ शेर तो कहो
लफ्जों से उसके हुस्न को तोला नहीं गया
सोचा था मैंने आज के सब बोल दु मगर
मौका मिला तो मौके पे बोला नहीं गया

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