Qaafiya Bazm-e-Adab

Sang Ahmad Bismil Jaaye

Manzoor Islam

चेहरा मेरा खिल जाए
जब खोया कुछ मिल जाए

तब लगता है भारत है
संग अहमद बिस्मिल जाए

हक़ वाले तुम मत जाना
जिस रस्ते बातिल जाए

मत बहना तुम उनके संग
जो तन्हा साहिल जाए

जिंदानों में है मासूम
और बाहर क़ातिल जाए

निस्बत जिनकी इक़रा हो
क्यूँकर वह जाहिल जाए

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