साथ दे दें वो गर खुशी के साथ
उम्र गुज़रेगी फिर उन्हीं के साथ
चार कांधों पे जा के बतलाया
ऐसे जाते हैं खामोशी के साथ
कैसी गुज़री तुम्हारी वो रातें
जो गुज़ारी गईं किसी के साथ
घर का हँसमुख शरारती लड़का
अब छुपाता है ग़म, हँसी के साथ
आज घर बाँट लेते हैं भाई
बाँटते थे जो दुख ख़ुशी के साथ
वक़्त ठहरा हुआ है लेकिन मैं
चल रहा हूँ मेरी घड़ी के साथ
वो जनाज़े में साथ चलते हैं
जो न चल पाए ज़िंदगी के साथ
सैफ ग़ज़लें खरीद कर पढ़ना
क्या तमाशा है शायरी के साथ