Qaafiya Bazm-e-Adab

Roz Naye Kartab Dikhlaaye Jaadugar

Irfan Tarique Khan

रोज़ नए कर्तब दिखलाए जादूगर
दुनिया का मतलब समझाए जादूगर

तुम कहते हो हर दम हँसता रहता है
आँसू पर पैवंद लगाए जादूगर

देख के उस को यूँ सारे ताली पीटे
ऊँचाई से जब गिर जाए जादूगर

बाक़ी तो पानी से आग बुझाते हैं
और पानी में आग लगाए जादूगर

सारे दर्ज़ी कपड़े काटा करते हैं
इंसाँ के टुकड़े कर जाए जादूगर

लोग यहाँ चिंगारी से डर जाते हैं
अपने मुँह से आग उड़ाए जादूगर

लिखना तो अल्फ़ाज़ की हेरा-फेरी है
ख़ुद को अब 'इरफ़ान' बताए जादूगर

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