पी गया मेरे हिस्से का पानी
जिसके ख़ातिर बचाया था पानी
डूबकर मरने जब भी मैं निकला
चुल्लू भर भी नहीं मिला पानी
कितने मोती गवाएं हैं मैंने
तेरी आँखों से जब बहा पानी
ऐसे घुल-मिल गया हूँ मैं उसमें
दूध में जैसे मिल गया पानी
जिसके ख़ातिर मैं रह गया प्यासा
उसने ही बस नहीं पिया पानी