Qaafiya Bazm-e-Adab

Pi Gaya Mere Hisse Ka Paani

Raj Vishawakarma

पी गया मेरे हिस्से का पानी
जिसके ख़ातिर बचाया था पानी

डूबकर मरने जब भी मैं निकला
चुल्लू भर भी नहीं मिला पानी

कितने मोती गवाएं हैं मैंने
तेरी आँखों से जब बहा पानी

ऐसे घुल-मिल गया हूँ मैं उसमें
दूध में जैसे मिल गया पानी

जिसके ख़ातिर मैं रह गया प्यासा
उसने ही बस नहीं पिया पानी

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