पता नहीं क्यूँ उसी से ही बेशुमार करे
जो प्यार मेरा हमेशा ही दरकिनार करे
अली के जैसा कोई भी न ऐसा वार करे
बदन दो टुकड़े हुए जब भी ज़ुल्फ़िकार करे
नहीं मिलेगा कहीं भी ये पूरी दुनिया में
जो माँ की तरह मुझे प्यार और दुलार करे
बता तो दे कोई नुस्ख़ा जो तेरे पास में हो
मैं क्या करूँ जो तिरा दर्द बे-क़रार करे
मुआफ़ी माँग ली और बख़्श दी ख़ुदा ने ख़ता
भले ही ग़लती दुबारा हज़ार बार करे