Qaafiya Bazm-e-Adab

Mujhko Beti Se Nawaza Hai Khuda Ne Mere

Haider Ali Haider

लगने वाले हैं बुरे वक़्त ठिकाने मेरे
मुझको बेटी से नवाज़ा है ख़ुदा ने मेरे

आप तो फिर भी हैं कुछ नर्म कई पत्थर दिल
रो पड़े सुनके मुहब्बत के फ़साने मेरे

है मसीहा की ज़रूरत ना दवा की मुझको
जबसे बैठा है कोई आ के सिरहाने मेरे

जब रहा साथ किसी ने भी कोई क़द्र ना की
ढूंढते फिरते हैं अब लोग ठिकाने मेरे

दिल भी अब करता नहीं घर से निकलने का मेरा
जबसे कम मिलने लगे दोस्त पुराने मेरे

कौन परदेस में होता है किसी का 'हैदर'
कौन आएगा यहाँ नाज़ उठाने मेरे

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