Qaafiya Bazm-e-Adab

Muddaton ke baad kehte ho ke bolo kya hua

Bhagyshree Rajbhar

मुद्दतों के बाद कहते हो के बोलो क्या हुआ
याद है अब तक मुझे सब आपका बोला हुआ

आप से वादा रहा खामोश हो जाऊगी मैं
जब कभी भी दरमियाँ अपने अगर झगड़ा हुआ

फिर कभी हम ने किसी पर भी यक़ीं रखा नहीं
हर नए चेहरे पे जब पहचान का धोखा हुआ

मेरे दिल को तोड़ कर खुश कर रहा है ग़ैर को
ऐसा करने से कलेजा क्या तेरा ठंडा हुआ

एक मुफलिस आसमां को देख कर रोने लगा
कुर्सियों पर बैठने वालों का जब सौदा हुआ

ए सुहानी जब से निकली झूठ की दुनिया से तू
कहने वाले कह रहे हैं ये बहुत अच्छा हुआ

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