मुद्दतों के बाद कहते हो के बोलो क्या हुआ
याद है अब तक मुझे सब आपका बोला हुआ
आप से वादा रहा खामोश हो जाऊगी मैं
जब कभी भी दरमियाँ अपने अगर झगड़ा हुआ
फिर कभी हम ने किसी पर भी यक़ीं रखा नहीं
हर नए चेहरे पे जब पहचान का धोखा हुआ
मेरे दिल को तोड़ कर खुश कर रहा है ग़ैर को
ऐसा करने से कलेजा क्या तेरा ठंडा हुआ
एक मुफलिस आसमां को देख कर रोने लगा
कुर्सियों पर बैठने वालों का जब सौदा हुआ
ए सुहानी जब से निकली झूठ की दुनिया से तू
कहने वाले कह रहे हैं ये बहुत अच्छा हुआ