Qaafiya Bazm-e-Adab

Mohabbat Mein Khasara Chal Raha Hai

Hemant Sharma

महब्बत में ख़सारा चल रहा है
हमारा बस गुज़ारा चल रहा है

भँवर में प्रेम के लगता है ऐसे
नदी का बस किनारा चल रहा है

न बुझती है न पूरी जल रही है
चरागों में शरारा चल रहा है

उसे हम जीत कर भी हार बैठे
अजब ये खेल सारा चल रहा है

न मांझी है न कोई साथ अपने
दुआओं से शिकारा चल रहा है

थकी आँखों को अब कैसे सुलाएँ
फलक पर एक सितारा चल रहा है

वो मज़बूरी कहें या ख़ुद-फ़रेबी
बिना उनके गुज़ारा चल रहा है

वही मुंसिफ़, अदालत भी उसी की
मुक़दमा बस हमारा चल रहा है

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