Qaafiya Bazm-e-Adab

Mitti Ka Gudda Ho Jaise

Irfan Tarique Khan

मिट्टी का गुड्डा हो जैसे
लहरों से टूटा हो जैसे

ख़ुद ही ख़ुद में खो जाता है
ख़ुद से वो मिलता हो जैसे

इक गाड़ी से ख़ून हुआ है
पूरा घर कुचला हो जैसे

ग़ज़लें उस की इतनी प्यारी
मेरे लिए लिखता हो जैसे

मेरी साँसों से ज़िंदा है
मुझ पे वो मरता हो जैसे

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