मिट्टी का गुड्डा हो जैसेलहरों से टूटा हो जैसे
ख़ुद ही ख़ुद में खो जाता हैख़ुद से वो मिलता हो जैसे
इक गाड़ी से ख़ून हुआ हैपूरा घर कुचला हो जैसे
ग़ज़लें उस की इतनी प्यारीमेरे लिए लिखता हो जैसे
मेरी साँसों से ज़िंदा हैमुझ पे वो मरता हो जैसे