Qaafiya Bazm-e-Adab

Meri In Aankhon Mein Nami Na Hoti

Alka Rani

मेरी इन आँखों में नमी न होती
जो दूर तुझसे मैं कभी न होती

गर तुम कहीं निभाना सीख जाते
इस ज़िन्दगी में कोई कमी न होती

थी ख्यालों में भी इश्क़ की ही बातें
तन्हाई में यूँ शायरी न होती

हम घर पे वक्त से जो आते जाते
यूँ बंद घर की ये घड़ी न होती

फिर तेरे ही लिए मैं खाब बुनती
फिर ऐसे ख्वाहिशें थमी न होती

होती वफ़ा जो तेरी तर्बियत में
ज़ाया यूँ मेरी आशिक़ी न होती

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