लगती है मुझे अब भी मिरी मोनिस-ए-मन फूल
नाज़ुक सी है वो पतली कमर उसका बदन फूल
हैं रश्क़-ए-परी रश्क़-ए-क़मर रश्क़-ए-चमन फूल
लगते हैं मिरी जान तिरे पिस्ता-दहन फूल
जैसा है मिरा यार, मुझे प्यार है बेहद
लहजा है भले सख्त मगर उसका है मन फूल
डोली उठी उसकी तो उठा मेरा जनाज़ा
हैरान है हर कोई कि दोनों के कफ़न फूल
हर शख़्स को इस बात से तक़लीफ है उस्मान
कांटे की तरह मैं हूं, मगर मेरी दुल्हन फूल