तू जहाँ है वहाँ बहारें हैं
और ख़ुशियों का आना जाना है
मेरा कमरा है क़ैदख़ाना इक
और उदासी का आना जाना है
चीखती है जहाँ पे ख़ामोशी
ऐसी तन्हाई मुझको भाती है
उसको हिचकी भले ही ना आए
याद उसकी बहुत ही आती है
मेरे कमरे की चारों दीवारें
मुझपे हसती हैं ताने देती हैं
कान आते नहीं नज़र इनके
ना मुझे कुछ सुनाने देती हैं
मेरे आँसू यूँही नहीं टपके
उसकी यादों का भी है ग़म मुझ पर
बिगड़ी हालत मेरी सुधर जाए
एक नज़र डालिए सनम मुझ पर
रख के इंसाफ के तराज़ू पर
सबके अलफ़ाज़ तोल देता हूँ
खटखटाता है कोई दरवाज़ा
जल्दबाज़ी में खोल देता हूँ
कोई जामी यहाँ नहीं रहता
सबके मुँह पे मैं बोल देता हूँ