ख़ुलूस व इश्क़ के मज़बूत धागे टूट जाते हैं
ग़लतफ़हमी हो गर पैदा तो रिश्ते टूट जाते हैं
हमारे गाँव में तो झूठ भी बोला नहीं जाता
तुम्हारे शहर में लोगों के वादे टूट जाते हैं
मेरी आँखों ने ये मंज़र हज़ारों बार देखा है
वफ़ा की रहगुज़र में अच्छे-अच्छे टूट जाते हैं
सिखाया है हुनर दुनिया के सबसे सख़्त जौहर ने
मुक़ाबिल अपने आ जाएँ तो हीरे टूट जाते हैं
निकलता हूँ तलाश-ए-यार में मैं बारहाँ घर से
मगर हर बार क़िस्मत के सितारे टूट जाते हैं
ज़रूरत है उन्हें दें काम करने की तवानाई
उठाकर जो तिजारत में ख़सारे टूट जाते हैं
निकल कर आ गया है सैफ़ इस ग़म के शिकंजे से
कि जिसमें फँस के अक्सर बेसहारे टूट जाते हैं