Qaafiya Bazm-e-Adab

Jab Tak Teri Soorat Ka Nazara Nahin Hoga

Saif Dehlvi

जब तक तिरी सूरत का नज़ारा नहीं होगा
तब तक तिरे आशिक़ का गुज़ारा नहीं होगा

ये जानते हैं हम वो हमारा नहीं होगा
पर उस से बिछड़ना भी गवारा नहीं होगा

दुनिया तो नहीं देखी मगर हम को यक़ीं है
दुनिया में कोई आप से प्यारा नहीं होगा

क्या मैं ही करूँ आप से इज़हार-ए-मोहब्बत
क्या आपकी जानिब से इशारा नहीं होगा

तुम होते हुए मेरे किसी और को देखो
देखो मिरी आँखों को गवारा नहीं होगा

दिल तोड़ने वाले हमें अब तुझ पे भरोसा
कोशिश भी करेंगे तो दोबारा नहीं होगा

तब लोग ज़माने में हमें याद करेंगे
जब नक्श ज़माने में हमारा नहीं होगा

उस दौर में भी 'सैफ़' तुम्हारा ही रहेगा
जिस दौर में कोई भी तुम्हारा नहीं होगा

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