जब तक तिरी सूरत का नज़ारा नहीं होगा
तब तक तिरे आशिक़ का गुज़ारा नहीं होगा
ये जानते हैं हम वो हमारा नहीं होगा
पर उस से बिछड़ना भी गवारा नहीं होगा
दुनिया तो नहीं देखी मगर हम को यक़ीं है
दुनिया में कोई आप से प्यारा नहीं होगा
क्या मैं ही करूँ आप से इज़हार-ए-मोहब्बत
क्या आपकी जानिब से इशारा नहीं होगा
तुम होते हुए मेरे किसी और को देखो
देखो मिरी आँखों को गवारा नहीं होगा
दिल तोड़ने वाले हमें अब तुझ पे भरोसा
कोशिश भी करेंगे तो दोबारा नहीं होगा
तब लोग ज़माने में हमें याद करेंगे
जब नक्श ज़माने में हमारा नहीं होगा
उस दौर में भी 'सैफ़' तुम्हारा ही रहेगा
जिस दौर में कोई भी तुम्हारा नहीं होगा