Qaafiya Bazm-e-Adab

Hamsafar Khush Jamaal Hai Mera

Usman Akbar

हमसफ़र खुश जमाल है मेरा
कितना प्यारा ख्याल है मेरा

जैसे मछली हो दूर पानी से
बिन तुम्हारे ये हाल है मेरा

उन लोगों की ये लाली है यारों
इसलिए लाल गाल है मेरा

उसके बिन खुश मैं रह नहीं सकता
मुस्कुराना मुहाल है मेरा

आज वो क्यों उदास हैं अकबर
शायद उनको मलाल है मेरा

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