Qaafiya Bazm-e-Adab

Hamari Chiraiyya Hamein Daan De Do

Uday Divakar

सभी खेत ले लो ये खलिहान ले लो
हमारी चिरईया हमें दान दे दो
भवन में पड़े सारे सामान ले लो
हमारी चिरईया हमें दान दे दो

अठन्नी अठन्नी जुटाई थी हमने
उसी से चिरईया सजाई थी हमने
हमें क्या पता एक दिन जान लेगी
सहनशीलता जो सिखाई थी हमने

बदन पे चढ़े सारे परिधान ले लो
हमारी चिरईया हमें दान दे दो

कभी अपनी अम्मा की चुटिया बनाती
कभी अपने पापा की रोटी पकाती
वो सागौन शीशम बड़े हो गए हैं
जिन्हें रोज लोटे से पानी पिलाती

सुनो! चार पेड़ों के बागान ले लो
हमारी चिरईया हमें दान दे दो

वो कहती पति मानते आप जैसे
ससुर–सास ऐसे हैं मां–बाप जैसे
मगर उसका बेजान तन कह रहा है
है अभिशाप शादी पति श्राप जैसे

मुझे बेच दो मेरी पहचान ले लो
हमारी चिरईया हमें दान दे दो

सुनो! घर में इसकी घड़ी रह गई है
अरे हां! पीपिहरी पड़ी रह गई है
रुको! मेरी ख़ातिर खरीदा था इसने
अभी सौ रुपए की छड़ी रह गई है

चलो घर की चौखट ये दालान ले लो
हमारी चिरईया हमें दान दे दो

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