Qaafiya Bazm-e-Adab

Ghar Se Bahar To Nikalna Hoga

Manzoor Islam

घर से बाहर तो निकलना होगा
तुम को साँपों को कुचलना होगा

जिनसे नुकसान चमन को पहुंचे
ऐसे माली को बदलना होगा

तुम तो हो ताज महल कि मानिंद
ऐसे महलो में टहलना होगा

गर तुम्हें शेर सा बनना है तो
खुदकी तारीख में चलना होगा

तुमको सूरज सी चमक पाने को
खुदको सूरज सा ही जलना होगा

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