Qaafiya Bazm-e-Adab

Bolunga Use Mujrim-o-Qatil Use Kehna

Saif Dehlvi

बोलूँगा उसे मुजरिम ओ क़ातिल उसे कहना
पहना दे मुझे तौक़ ओ सलासिल उसे कहना

वो जिस को डराने पे सताने पे तुला है
उस क़ौम में कोई नहीं बुज़दिल उसे कहना

दिखती है बहुत उस को ज़माने में ख़राबी
आईना रखे अपने मुक़ाबिल उसे कहना

सब उस की इनायत से बना हूँ जो बना हूँ
वरना मैं कहाँ था किसी क़ाबिल उसे कहना

ये राह ए मोहब्बत है मियाँ राह ए मोहब्बत
इस राह में चलते नहीं बुज़दिल उसे कहना

हर शख़्स मुकद्दर का सिकंदर नहीं होता
हर शख़्स को मिलती नहीं मंज़िल उसे कहना

कहना वो किसी तौर भी हासिल मुझे कर ले
या फिर मुझे हो जाये वो हासिल उसे कहना

ये सब दर ओ दीवार तो ऐसे ही सजे हैं
वो शख़्स है आराइश ए महफ़िल उसे कहना

कहना मैं बहुत ज़्यादा ही मुश्किल में घिरा हूँ
आसान करे वो मेरी मुश्किल उसे कहना

आते हैं सुबह शाम अक़ारिब उसे मिलने
बचना है तेरे सैफ़ का मुश्किल उसे कहना

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