Qaafiya Bazm-e-Adab

Bas Tere Baare Mein Socha Karta Hoon

Irfan Tarique Khan

बस तेरे बारे में सोचा करता हूँ
यूँ तन्हाई को मैं तन्हा करता हूँ

इक अच्छाई मुझ में अब भी है बाक़ी
झगड़े वाली बात को टाला करता हूँ

हाथ उठा कर मुझ को क्या मिल जाएगा
शाइ'र हूँ लफ़्ज़ों से मारा करता हूँ

धोका देता है जब भी कोई मुझ को
मैं उस पल ख़ुद पर ही ग़ुस्सा करता हूँ

बाप बनेगा बेटा समझेगा तब वो
आधी रोटी को क्यों आधा करता हूँ

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