बारिश में बेख़ौफ़ नहाए कितने अरसे बीत गए
काग़ज़ की इक नाव बनाए कितने अरसे बीत गए
बचपन में माँ के हाथों से खाना खाने मिलता था
उन हाथों से खाना खाए कितने अरसे बीत गए
मिलते थे हर रोज़ सभी हम घूमने जाया करते थे
यारों की महफ़िल को सजाए कितने अरसे बीत गए
अब तो इक लड़की मिलना भी कितना मुश्किल लगता है
इक साथ अब दो-चार पटाए कितने अरसे बीत गए
ख़ूब मज़ा आता था पहले, बहनें थीं जब मायके में
बहनों को सरदार सताए कितने अरसे बीत गए