बंध गए जब से उसके बंधन में
ग़म की बारिश हुई है जीवन में
आँख अश्कों से भर गई ऐसे
झील उफन आए जैसे सावन में
हिज्र कटता नहीं है जब तेरा
रक़्स करती है याद आँगन में
साँवला रंग सुरमई आँखें
जैसे हीरे जड़े हों कुंदन में
कर के कोशिश उसे मना लीजे
ख़त्म रिश्ता न कीजे अनबन में
इल्म तहज़ीब भी सिखाता है
शोर होता है ख़ाली बर्तन में
अच्छे कर्मों का फल मिला मुझको
जन्म पाया है जो सनातन में