Qaafiya Bazm-e-Adab

Bandh Gaye Jab Se Uske Bandhan Mein

Manisha Singh

बंध गए जब से उसके बंधन में
ग़म की बारिश हुई है जीवन में

आँख अश्कों से भर गई ऐसे
झील उफन आए जैसे सावन में

हिज्र कटता नहीं है जब तेरा
रक़्स करती है याद आँगन में

साँवला रंग सुरमई आँखें
जैसे हीरे जड़े हों कुंदन में

कर के कोशिश उसे मना लीजे
ख़त्म रिश्ता न कीजे अनबन में

इल्म तहज़ीब भी सिखाता है
शोर होता है ख़ाली बर्तन में

अच्छे कर्मों का फल मिला मुझको
जन्म पाया है जो सनातन में

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