वो इक लड़का जो चंचल था बहुत ख़ामोश रहता है
पसंदीदा था महफिल का बहुत ख़ामोश रहता है
अचानक क्या हुआ ऐसा जो अब उसकी ये हालत है
मिला अपनों से धोखा क्या बहुत ख़ामोश रहता है
चले भी आओ अब आखिर कहां तक हौसला रक्ख़ू
बिना तेरे मकां दिल का बहुत ख़ामोश रहता है
वही जो ख़ुशबुओं जैसा हवाओं में बिखरता था
तेरी जुल्फों का वो गजरा बहुत ख़ामोश रहता है
परिंदों से फ़ज़ाओं तक सभी तो पूछते हैं अब
उजाला क्यों ये हर दिन का बहुत ख़ामोश रहता है
मेरे शेरो सुखन सब नगमगी नग़्मो के काबिल थे
मगर दिल जब से है टूटा बहुत ख़ामोश रहता है
मै जब इस बार घर लौटा तो पूछा मेरे अब्बू ने
लगा सदमा है क्या बेटा बहुत ख़ामोश रहता है
मुहंदिस महफिलें करता है शहर ए मुम्बई भर में
मगर जब गांव को जाता बहुत ख़ामोश रहता है