Qaafiya Bazm-e-Adab

Anjaam-e-Mohabbat

Nafis Alam Shaikh

एक हँसी मार दी गई
एक फूल पैरों तले रौंदा गया
कई सपने तोड़ दिए गए
परिंदे को पिंजरे में डाल दिया गया

​एक परी को कम उम्र में ही कई दर्द दिए गए
मुस्कुराहट के बदले आँसू दिए गए
अपनों ने ऐतबार नहीं किया, क्या शिकवा गैरों से?

मोहब्बत के बदले कई ज़ुल्म किए गए
​कई ज़ुल्म सहे गए

अपने वजूद का कत्ल करके मैंने 'क़बूल' कहा
मैं चीखते-चीखते मर गई जब 'क़बूल' कहा

​बुज़ुर्गों ने फैसला किया,
इज़्ज़त बचा ली गई, दिल जला दिया गया
लाश का सौदा हुआ

रूह बोल उठी, मर जाना, पर मोहब्बत के हाथ न आना

​दिल में हो अगर किसी की चाहत
दफ़न करना और गुज़र जाना
ये क्या इंसाफ? बस तुम मज़ाक उड़ाना
हम लड़कियों को दुकान की तरह बेच आना

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