ऐसे नज़रों से जादू किया ना करो
अपने वश में हमें तुम लिया ना करो
जिन मरज़ की दवा इस जहां में नहीं
वो मरज़ तुम यूँ हमको दिया ना करो
अब तो हाज़िर हैं मेरी ये दस्तार भी
अब तो अश्कों को अपने पिया ना करो
मांग कर माफ़ी गलती दोबारा करे
ज़ख्म देना है फिर तो सिया ना करो
खौफ ऐसा कि दुश्मन से तुम जा मिले
ज़िन्दगी बुज़दिलों की जिया ना करो